भारत-नेपाल में हिंदुओं का होना विदेशी संबंध में मायने नहीं रखता: नेपाल
हिन्दी और नेपाली भाषा को भी देखें, तो न केवल लिपि देवनागरी है बल्कि शब्दावलियाँ भी एक जैसी हैं. जो हिन्दी जानता या पढ़ता है, वो थोड़ी बहुत नेपाली भी पढ़ और समझ सकता है.
तकिया कलाम की तरह एक बात अक्सर कही जाती है कि नेपाल और भारत के बीच बेटी-रोटी का रिश्ता है. नेपाल की सीमा तीन तरफ़ से भारत से जुड़ी है और एक तरफ़ तिब्बत की सीमा लगती है. इतना कुछ होने के बावजूद नेपाल और भारत के रिश्ते आजकल ठीक नहीं हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद मोदी ने पिछले कार्यकाल में चार सालों के भीतर नेपाल के तीन दौरे किए थे. मोदी का तीसरा नेपाल दौरा मई 2018 में था. तीसरे दौरे में मोदी ने नेपाल से रिश्ते दुरुस्त करने में धार्मिक रास्ते का सहारा लिया था. इस दौरे में मोदी सीधे जनकपुर गए और फिर मुक्तिनाथ.
ये
दोनों जगहें हिंदू धर्मावलंबियों के लिए अहम हैं. जनकपुर के मंदिर में पूजा करने के बाद मोदी काठमांडू गए थे. पहले के दौरे में भी मोदी पशुपतिनाथ मंदिर गए थे. ज़ाहिर है कि मोदी जब नेपाल के मंदिरों में जाते होंगे, तो उनके मन में दोनों देशों में व्यापक स्तर पर धार्मिक पहचान की समानता रहती होगी.
इसके बावजूद मोदी सरकार में नेपाल से रिश्ते कई मामलों में ऐतिहासिक रूप से ख़राब हुए हैं.आख़िर ऐसा क्यों है? इस सवाल का जवाब जानने के लिए और दूसरे कई मुद्दों पर बीबीसी हिन्दी ने नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप ज्ञवाली से फ़ोन पर बातचीत की.
भारत और नेपाल के द्विपक्षीय संबंधों में दोनों देशों की बहुसंख्यक आबादी का हिंदू होना क्या मायने रखता है? क्या इससे संबंधों में गर्मजोशी आती है?
इस
सवाल पर प्रदीप ज्ञवाली कहते हैं, ''भारत और नेपाल में कई स्तरों पर समानता है. सांस्कृतिक समानता दोनों देशों के संबंधों को मज़बूत बनाने वाली सबसे अहम कड़ी है. दोनों देश एक गौरवशाली सभ्यता का प्रतिनिधित्व करते हैं और इसमें समृद्ध ज्ञान परंपरा रही है. आयुर्वेद, योग, ज्योतिष भारत और नेपाल दोनों देशों के लिए समान हैं. दोनों देशों की साझी संस्कृति लोगों के बीच के आपसी संबंधों को मज़बूत बनाती है.''
''नेपाल और भारत के संबंधों में कभी-कभार उतार चढ़ाव भी आते हैं, लेकिन सांस्कृतिक संबंध की जड़ें बहुत गहरी हैं. इसलिए दोनों देशों के लोगों के बीच संबंध में गर्मजोशी बनी रहती है. लेकिन हमें इस बात को समझने की ज़रूरत है कि संस्कृति और धर्म का घालमेल नहीं करना चाहिए. धर्म और संस्कृति दोनों अलग-अलग पहलू हैं. धर्म व्यक्तिगत आस्था का विषय होता है. यह बिल्कुल निजी होता है. मेरा मानना है कि धर्म को न तो देश के आंतरिक मामले में लाना चाहिए और न ही दूसरे देश के साथ संबंधों के बीच में लाना चाहिए.''
भारत नहीं चाहता था कि नेपाल सेक्युलर स्टेट बने?
2008 में नेपाल में जब राजशाही लंबे आंदोलन के बाद ख़त्म हुई, तो लोकतंत्र स्थापित हुआ और संविधान बनने की प्रक्रिया शुरू हुई.
सितंबर 2015 में नेपाल ने अपना नया संविधान लागू किया और इसमें नेपाल को सेक्युलर स्टेट बताया गया. ऐसा तब हुआ जब भारत में एक हिंदुत्व विचारधारा वाली पार्टी के पोस्टर बॉय माने जाने वाले नरेंद्र मोदी की सरकार थी.
26 मई 2006 को बीजेपी के तत्कालीन अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा था, ''नेपाल की मौलिक पहचान एक हिंदू राष्ट्र की है और इस पहचान को मिटने नहीं देना चाहिए. बीजेपी इस बात से ख़ुश नहीं होगी कि नेपाल अपनी मौलिक पहचान माओवादियों के दबाव में खो दे.''
राजशाही के दौरान नेपाल एक हिंदू राष्ट्र के तौर पर जाना जाता था. तब नेपाल दुनिया का एकमात्र हिंदू राष्ट्र था.
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